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अंजस सोशल मीडिया
संत साहित्य पर दूहा
पद
सबद
त्रिभंगी छंद
संवैया छंद
दूहा
कवित्त
साखी
चौपाई
अरिल्ल छंद
कविता
रमैणी
छंद बेअक्खरी
दूहा
17
एकै सब तन रमि रह्यो
संत चरणदास
जिहि अग्नि न धूवां नीसरै
बखना जी
औजौं क्यों आशा रही
बखना जी
नारद बचन सुंदर सुणि
संत मावजी
रांडां मिली मंगल कीयौ
बखना जी
ध्यावै सोई उधरै
चिमनजी कविया
कामी कंथ के कारणै
फूलीबाई
राम कौसल्या सुमता लखंण
मेहा गोदारा
दूध मिल्यौ ज्यूं नीर मैं
बखना जी
पछि पांणी राखै नही
बखना जी
क्या इन्द्र क्या राजवी
फूलीबाई
चौकौ दै अलगेरौ आछै
बखना जी
कथा सुंणे जे अहंमनी
डेल्हजी
मन पवन अरु सुरति थिर
बखना जी
कर जोड़े कहै केकवी
मेहा गोदारा
जानी आये गोरवे
फूलीबाई
कर माहैं माला फिरै
बखना जी