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अंजस सोशल मीडिया
‘बखना’ मन मैलो रह्यो
बखना जी
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‘बखना’
मन
मैलो
रह्यो,
सुण्यों
नहीं
उपदेश।
धोइ
धोइ
तैं
धोळा
कीया,
पांणी
माहैं
केश॥
स्रोत
पोथी
: बखना जी की वाणी
,
सिरजक
: बखना जी
,
संपादक
: मंगलदास स्वामी
,
प्रकाशक
: लक्ष्मीराम ट्रस्ट, जयपुर
,
संस्करण
: प्रथम
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