दादू, बहु रूपी मन तब लगै, जब लग माया रंग।

जब मन लागा राम सौं, तब दादू एकै अंग॥

स्रोत
  • पोथी : श्री दादू वाणी ( मन का अंग से उद्धृत) ,
  • सिरजक : दादूदयाल ,
  • संपादक : नारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : श्री दादू दयालु महासभा , जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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