आद भवानी अंबिका, गढ तनोट री राय।
दुसम्यां रौ थूं दमण कर, सूरां री है सहाय॥
पच्छम धर रा बांकुड़ा, मरु धरती रा वीर।
आठ पौर चौकस खड़्या, ज्यूं तणियोड़ा तीर॥
लांगैवाळौ तळ प्रबळ, पच्छम धर री सींव।
रण बंका रुखवाळिया, भारत भू रा भींव॥
च्यार दिसंबर सांझ री, बजी'ज पूरी आठ।
पाक मुजाहिद लाविया, सैफी टैंकां साठ॥
सीमा रा रक्षक खड़्या, ज्यूं लोहै री भींत।
मर जावै पण ना हटै, आ वीरां री रीत॥
पोहरैदार हाकल करी, हो ज्यावौ हुंस्यार।
लोहै रै घोड़ै चढ्या, बढिया आवै पार॥
वीरां मांड्या मोरचा, कर में ले हथियार।
जय जगदंब जननी तणी, गूंज उठी जयकार॥
रेतै में रगदोळिया, झल्ल-झल्ल घुटियाह।
गोळ्यां सूं भळ बींधिया, किरचां सूं कूटियाह॥
हू-हू हल्ला बोलता, गब्बर तक हटियाह।
मनसूबा याय्या तणा, मन में ही मटियाह॥