हिंदी फिलमां री दुनियां में आज भरत व्यास रौ नांव किणी सूं अणसैंधौ कोनी। लारला 30-40 बरसां सूं हिंदी फिलमां रा गीतकारां में वांरी अेक सारीसी पैठ।

भरत जी रौ जलम राजस्थांन रै चूरू कस्बै में व्हियौ। टाबर पणै सूं ईं भरत जी नै रामलीलावां अर नाटकां रौ घणौ कोड हौ। चूरू री सांकड़ी-सांकड़ी गळियां अर जूनी ढूंढा व्ही थकी हवेलियां। भरत जी रौ मजमौ आपरा साथियां-बेलियां साथै वठै जमतौ। कोई लिछमण बणतौ तौ कोई सीता, अर कोई रांम। अर ठावीजतौ वठै हाथूं-हाथ नाटक।

टाबर पणै में लाग्योड़ौ नाटकां रौ औ ई चसकौ आगै चाल’र कलम-दवात तांईं लेगौ अर भरत जी अेक सूं अेक नांमी कवितावां लिखी, अर गीत रचिया।

टाबर पणै री पढाई चूरू में करियां पूठै भरत जी डूंगर कॉलेज बीकानेर में भरती होया। साहित, संगीत अर नाटकां रै साथै-साथै खेलां रौ ई कोड भरत जी में जाग्यौ। वै वॉलीबाल अर फुटबाल घणी आछी रम्या करता।

पढाई रै सारू ई भरत जी कलकत्तै पूगा। वठै रेकॉर्डिंग कम्पनी सूं सैंध-सैंध घलतां जेज ई कोनी लागी। राजस्थांनी भासा रा छोटा-छोटा नाटक, कोमिक, अर आपरा रचियोड़ा गीतां रा ग्रामोफोन रेकॉर्ड बजार में धड़ाधड़ आय पूगा। वां ईं दिनां, वांरी लिखियोड़ी कविता ‘केसरिया पगड़ी’ आखै भारत में घणौ नांव पायौ।

आं ईं दिनां व्यास जी री केई कविता-पोथ्यां छपी, पण तौ ई रंगमंच रा संस्कार वां में सदा कायम रैया। सरगवासी पिरथीराज कपूर जद ‘पिरथीराज चौहांण’ नाटक करियौ, तौ चंदबरदाई री भूमिका भरत जी व्यास नै दीवी, अर औ नाटक घणौ जस पायै।

कलकत्तै रै पछै भरत जी बंबोई रौ मनसोबौ कियौ, अर अठै पूग्यां आपरौ ध्यांन फिलमां री कांनी गयौ। पैल परथम निरमाता-निदेसक वी. अेम. व्यास भरत जी सूं टकराया। वांरा गीत सुणिया तौ रीझ’र रैगा। भरत जी रौ अेक गीत वै फिलम सारू टाळ्यौ अर वांनै गीत रौ मेहनतांनौ दियौ—रिपिया दस।

वां ईं दिनां पूना में ‘सालीमार फिलम’ नांव री संस्था फिलमां बणाया करती। सालीमार में वां दिनां जोस मलीहाबादी, किसण चंदर, रामानन्द सागर अर सागर निजामी जैड़ा साहितकार कांम करिया करता। आं सगळां रै बीच में ईं भरत जी आपरी न्यारी निरवाळी जगा बणाय लीधी। आं सगळां रा गीतां में उरदू सबद होया करता, पण भरत जी आपरा गीतां में हिंदी रा सबदां नै मांन दियौ।

आगै चाल ताराचन्द जी बड़जात्या री निजर जद भरत जी माथै पड़ी, तौ वै ‘चन्द्रलेखा’ फिलम सारू वां कनै सूं गीत लिखवाया। व्ही. सांताराम, विजयभट्ट अर विमलराय जैड़ा ख्यातीनांव निदेसकां ईं आप री कलम रौ जादू मांन्यौ।

व्यासजी अब तांई फिलमां सारू लगैटगै दो हजार गीत लिखिया परा। ‘राणी रूपमती’ रौ औ गीत तौ लोगां रै मूंडै माथै ई चढगौ—

''आ लौट के आजा मेरे मीत

तुझे मेरे गीत बुलाते हैं!''

व्हीं. सांताराम री ‘तूफान और दिया’ रौ औ गाणौ तौ जांणै फिलम रौ जीव ई हौ—

''निर्बल से लड़ाई बलवान की

यह कहानी है दिये की और तूफान की!’'

इणी भांत ‘दो आंखें बारह हाथ’ फिलम रौ औ खास गाणौ—

‘ऐ मालिक तेरे बंदे हम!’

कितरौ गहरौ भगती रौ सुर हौ इण गीत में। इणी तरा ‘जन्म-जन्म के फेरे’ फिलम रौ औ गीत—

''जरा सामने तो आओ छलिये

छुप-छुप छलने में क्या राज है

अब छुप न सकेगा परमात्मा

मेरी आत्मा की ये आवाज है!''

आज फिलमां में ‘फास्ट म्यूजिक’ रौ जमांनौ। जद भरत जी व्यास नै आज रै ‘फास्ट म्यूजिक’ रै बाबत पूछां तौ वै कैवै—“म्हे तौ भाव भरिया गीत ई बणावणा पसंद करां, जिका सुण्यां हरेक रौ हियौ जाग जावै। अै तुकबंदी आळा गीत—'घूम जा, घूम गयी’ अर ‘मेरा पढ़ने में नहीं लागै दिल’ म्हनै अंगै ई आछा नीं लागै।”

भरत व्यास कैवै के यूं म्हैं धुन माथै गीत बणावण रै खिलाफ कोनी। जे कोई धुन जीव में लाग जावै तौ उण माथै गीत लिखतां म्हैं दावौ ई कोनी संकूं। पण आजकल तौ रिवाज ई औ पड़गौ के पैला ट्यून त्यार कर लेसी, अर पछै उण माथै गीत लिखवा रौ कहसी।

भरतजी जीवण में नैतिकता रौ होवणौ घणौ लाजमी मानै। कांण-कायदा अर मरजादावां नै घणौ मांन देवै।

कीं राजस्थांनी फिलमां रा गीत ई भरतजी लिखिया। ‘रामू-चनणा’ (रंगीला राजस्थांन) अर ‘ढोला-मरवण’ जिण में खास। आं री कहाणियां ईं आप लिखी। आपरै लिख्योड़ौ 'अमरसिंघ राठौड़' रौ औ गीत तौ हदभांत ई चावौ अर जण-जण री जबांन माथै—

''थांनै काजळियौ बणाल्यूं

थांनै नैणां में लगाल्यूं

राज पळकां में बंद कर राखूंली!''

फिलमां रै अलावा ई आप रै अणगिणत गीतां री चूड़ियां बण चुकी है।

आपरा छोटा भाई ब्रजमोहनव्यास (बीं. अेम. व्यास) ई हिन्दी फिलमां रा आछा अभिनेता गिणीजै। राजस्थांन रा बासिंदा नै भरतजी रै नांव रौ घणौ अंजस।

भरत व्यास फिलमी गीतां रा चावा लिखारा। इण रूप में वां री अलग सूं ओळखांण देवण री दरकार नीं। क्यूं के वां रै इण रूप सूं सगळा ई वाकफ।

व्यासजी रौ राजस्थांनी कविता रै हलकै में ईं ठावौ मुकांम। वै जका हिन्दी गीत लिखिया, वै तौ चावा व्हिया इज—राजस्थांनी कवितावां ईं खूब सराईजी। व्यासजी आप री मायड़ भोम सूं भलां ईं अळगा व्है, मायड़ भासा सूं किणीं ईं रूप सूं अळग नीं। आप री जलम भोम री अबखी अर अणहूती हालत रौ वां रै अंतस में कितरौ रंग है, इण रौ परतख परमांण वां री आं ओळियां में उजागर व्हियौ—

कदै मुरधर देस थौ, बळ, विद्या, बेजोड़

भारत भू रौ सेहरौ, मात भोम रौ मोड़

कदै’क म्हांनै देख कर, जम सूं लेता होड

बादळ करता आरती, देवळ करता कोड

बाघ सरीसा सूरमा, गया जमी नै छोड़

अब टुकड़ा चुगता फिरै, टंट भिड़ाता मोड़

देख दसा या आपणी, मांणस होग्यौ मैण

बसका फाटै काळौ, टप टप टपकै मैण

आप री जलम भोम री आ दुरगत रौ अैंड़ौ चितरांम कोई कवि आप री मायड़ भासा नै टाळ दूजी किणीं भासा में नीं खैंच सकै। अर जद वौ चितरांम व्यासजी जैड़ा मंजियोड़ा लिखारां रै हाथां ऊतरै, तौ वौ सांगौपांग इज व्है।

ऊपर वाळी ओळियां में मरुधर रा वीरां री दुरगत रौ चितरांम है, तौ आगै वै पिंडतां नै ई भूलिया। राजस्थांन कदै’ई वीरां री खांन तौ हौ ई। ग्यांन रौ ई अकूत भंडार है। अठा रा पिंडत जगचावा हा। व्यास जी लिखै—

कदै’क विद्या रा अठै, भरिया समद तळाव

विप्र बरांमण आंगणै, झुकता आय नवाब

बलिहारी है समय री, होया इसा खराब

खोई सहज सुहावणी, मोती की सी आब

देबी सीख्या ओळमौ, लेणौ सीख्या दांन

आप’ज डूब्या पांडिया, ले डूब्या जजमांन

जलम भोम री आ पीड़ व्यास जी रै हिरदै में अठै रै हेत परतख करै। बरसां पैली फिलमां री पळपळाट करती दुनियां में रमियां पछै ई व आपरी मायड़ भोम सूं अळगा नीं जा सकिया।

व्यासजी नै राजस्थांन सूं तौ मोह है इज, पण इण सूं बेसी मायड़ भासा सूं हेत है। जद-जद वां इण बाबत आपरी कलम सूं कीं लिखियौ, तौ आप री मायड़ भासा में इज लिखियौ। ऊपर आप मुरधर देस री भूंडी दुरगत रौ चितरांम तौ वां री कलम रै पांण देख इज चुक्या हो। अबै आप देखौ के अमीर अर गरीब री हालतां रौ वै आप री दीठ सूं किंयां हवालौ दियौ है। व्यासजी कैयौ के भलां ईं परदेसां में जा’र आपां कितरौ ई धन अेकठ कर लियौ, पण गरीब री हालत नीं सुधारी तौ सब बिरथा है। हेटलै तबकै री हालत सूं वै कितरा दुखी है—आ बात वां री नीचै लिखी ओळियां भण नै आप खुद इज मैसूसौ। वै लिखै—

घीसूड़ै री झूंपड़ी, कर नै चकनाचूर

म्हैल बणायौ सेठ ज्यूं, लांबौ पेड़ खजूर

जिण म्हैलां री नींव में, मरग्या किता किसांण

जिण म्हैलां री भांत में, बणग्या किता मसांण

जिण म्हैलां रै चौक में, धधकै चिता विरांण

जिण नै चुणतां निकळग्या, किता जणां रा प्रांण

हाड्यां रौ गारौ बणा, लोही रौ दै लेप

छिड़का दे परसेव रा, दियौ लेवड़ौ लेप

साटण रा कपड़ा पहर, सेठां करौ गरूर

रोवै धींसू बापड़ौ, पल्लौ रह्यौ न पूर

म्हैलां परकी टूंकळी, ऊपर बैठ हजूर

गिटै गटागट चूरमां, भूखां मरै मजूर

लारला केई बरसां सूं व्यासजी फिलमां रै जरियै ई आपरा इणीं गत रा विचार सगळां नै दिया। व्यासजी माथै राजस्थांन अर राजस्थांनी नै घणौ गरब-गुमांन। घणकरा सूरवीर व्है, जकौ जुधभोम में आप री वीरता रा हाथ देखावै अर मायड़ भौम रौ नांव उजागर करै, तौ धरती नै चावी करै। व्यासजी मां सुरसती रा अैड़ा इज सपूत है, जका आप रै गीतां सूं आप री भोम अर भासा रौ नांव ऊजळौ कर रैया है।

स्रोत
  • पोथी : माणक (पारिवारिक राजस्थांनी मासिक) ,
  • सिरजक : भारती ,
  • संपादक : तेजसिंघ जोधा ,
  • प्रकाशक : माणक प्रकाशन ,
  • संस्करण : अक्टूबर 1981
जुड़्योड़ा विसै