यौवन पर कवित्त

यौवन या जवानी बाल्यावस्था

के बाद की अवस्था है, जिसे जीवनकाल का आरंभिक उत्कर्ष माना जाता है। इसे बल, साहस, उमंग, निर्भीकता के प्रतीक रूप में देखा जाता है। प्रस्तुत चयन में यौवन पर बल रखती काव्य-अभिव्यक्तियों को शामिल किया गया है।

कवित्त8

उमटी घनघोर घटा मन की

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

लोयण भरि निरखंत

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

गोरउ सउ गात रसीली सी बात

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

जाके आछे तीछे नयण

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’

सुंदर वेस लवेस अनोपम

जिनहर्ष मुनि ‘जसराज’