यौवन पर दूहा

यौवन या जवानी बाल्यावस्था

के बाद की अवस्था है, जिसे जीवनकाल का आरंभिक उत्कर्ष माना जाता है। इसे बल, साहस, उमंग, निर्भीकता के प्रतीक रूप में देखा जाता है। प्रस्तुत चयन में यौवन पर बल रखती काव्य-अभिव्यक्तियों को शामिल किया गया है।

दूहा8

तनु सरळी, पूरण रळी

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

सर वीणा पद-तळ कमल

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

अवरहिं गति मति पिण अवर

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

हिव यौवन-बय आवीयो

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'

नयण-बांण नारी तणे

कवि केशव 'कीर्तिवर्धन'