कवि पर लेख
‘राजस्थान’ नांव तो रजवाड़ां कै अेकमेक होयां पाछै पड़्यो, पण राजस्थानी की अेकरूप संस्कृति का ऊजळा चतराम तो पीढ्यां सूं भक्ति, वीरता अर सरजण का संस्कार जगार्या छै। बोल्यां को आंतरो तो पूरा मुलक में थोड़ा-थोड़ा फासला पै दीखै छै, पण हरदा की हलोळ में तो
म्हारौ जलम 15 अप्रैल रै दिन जयपुर शहर में हुयौ। वठै री सरजमीं रै माथै ई म्हैं होस संभाळ्यौ। बठै गोडाळियां चालणौ सीख्यौ, अर बठै ई मां-पा-बा इत्याद सबद कैवणौ सीख्यौ। बठै ई पढ-लिख’र परवांन चढ्यौ। रथखांनै रै नजदीक हवाम्हैल रै सामनै री स्कूल में अंग्रेजी