जूनौ कोस
नूवौ कोस
लोक परंपरा
ई-पुस्तक
महोत्सव
Quick Links
जूनौ कोस
नूवौ कोस
लोक परंपरा
ई-पुस्तक
महोत्सव
साइट: परिचय
संस्थापक: परिचय
अंजस सोशल मीडिया
क्रिसण पर पद
पद
सोरठा
दूहा
कविता
छंद
संवैया छंद
लोकगीत
सबद
काव्य खंड
भुजंगप्रयात छंद
कवित्त
साखी
ग़ज़ल
लेख
मुक्तक
चौपाई
छप्पय
कुण्डळियौ छंद
पद
87
बेह लिखिया जो लेख
डेल्हजी
आली! म्हांनै लागै विंद्रावन नीको
मीराबाई
पपइया रे! पिव की बाणी न बोल
मीराबाई
भज मन! चरण-कंवल अविनासी
मीराबाई
जोगी रे तू जुगत पिछाणी
जांभोजी
अरजन काढी आखड़ी
डेल्हजी
माई री! मैं तो लियो गोविंदो मोल
मीराबाई
खड़ी रहूं नारायण आगै, दरसण करकै जावूंगी
चंद्रसखी
चढ बैठ्यो कदम की डाळियां
चंद्रसखी
हीयो हरखै मन हंसै
पदम भगत
म्हारा ओळगिया घर आया
मीराबाई
ऊधोजी, म्हारो कांईं गुन्हा-तकसीर
चंद्रसखी
अब मोहिं नाचत राखहु नाथ
रज्जब जी
जा रे मोहन तोसैं प्रीत लगाई
चंद्रसखी
ए जी म्हारा कृष्णचंद्र बनवारी
चंद्रसखी
ओड़ निभाज्यो जी सांवरा
चंद्रसखी
आज बिंद्रावन रास रच्यो है
चंद्रसखी
बंसी बजाई सांवरै
चंद्रसखी
बैठा स्याम सिंघासण ऊपर
पदम भगत
जब तें मोहि नंदनंदन दृष्टि पर्यो माई
मीराबाई
रैन गई अब आये नै बिहारी
तखतसिंह
सावण री वड़ तीज सहेल्यां
पदम भगत
मोहना चले चलो कदम की छैंया रे
चंद्रसखी
आज महा मंगल गोकुल में
चंद्रसखी
मोय छाँड़ गये सजनवा
तखतसिंह
कौन गुन्हा दधि लूटी रे
चंद्रसखी
डस गयो आज नाग मोहे कारो
चंद्रसखी
हे री मैं तो दरद दिवानी
मीराबाई
रुत आइ रे बोल मोरा
चंद्रसखी
मेरे तो गिरधर गोपाल
मीराबाई
ए जी म्हारा दीनानाथ मुरारी
चंद्रसखी
सखी नीर भरिबा नहिं जाऊं
संत हरदास
मथरा मत जा गिरवरधारी
चंद्रसखी
सब मुख स्याम सरनैं गयैं
नागरीदास
जागो बंसी वारे ललना, जागो मोरे प्यारे
मीराबाई
सांवरियो मोह्यो हे रंगीली नथवारी
पदम भगत
अंबिका पूजबा कंवरी चाली
पदम भगत
सब दुख बड़े कहायैं होय
नागरीदास
पग घुंघरू बांधि मीरां नाची
मीराबाई
कलि के जनम बिगारत लोग
नागरीदास
अैसै भणै रुकमणी बाई
पदम भगत
जोगिया री प्रीतड़ी है दुखड़ा रो मूळ
मीराबाई
म्हारै हरियल वन रा सूवटडा़
पदम भगत
हेरी! मैं तो दरद-दिवाणी होइ
मीराबाई
वीरा ! मो सू भली रे करी
पदम भगत
ब्रह्मा बावै अंग लेबा लागो
पदम भगत
सुनत धुनि बैंन मधुराग गौरी रुचिर
नागरीदास
दरपन देखत, देखत नाहीं
नागरीदास
म्हारे म्हैंला आज्यो
तखतसिंह
प्रभु जी थे कहाँ गयो नेहड़ी लगाय
मीराबाई
1
2
Next
»
Go to:
1
2