राजा पर दूहा

दूहा15

वैद रहीजै राज-घर

सूर्यमल्ल मीसण

राणौ आयो रतनसी

कवि लब्धोदय

महाराज अजमाल रै

वीरभाण रतनू

समत अठार इकयासियै

चंडीदान मिश्रण

लोकां आगें इम कहै

कवि लब्धोदय

सभा माहि बैठो सकज

कवि लब्धोदय

टोटै सरकां भींतड़ा

सूर्यमल्ल मीसण

नरवर सूर निगेम

जग्गा खिड़िया

बालक अजीत ने बचावणों

केसरी सिंह सौदा