नृत्य पर बंतळ
नृत्य को मानवीय अभिव्यक्तियों
का रसमय प्रदर्शन कहा गया है। भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा में तो सृष्टि की रचना और संहार तक से नृत्य का योग किया गया है। प्रस्तुत चयन में नृत्य से अभिभूत कविताओं का संकलन किया गया है।
का रसमय प्रदर्शन कहा गया है। भारतीय सांस्कृतिक अवधारणा में तो सृष्टि की रचना और संहार तक से नृत्य का योग किया गया है। प्रस्तुत चयन में नृत्य से अभिभूत कविताओं का संकलन किया गया है।
अलेखूं फिल्मां रा निरत-निरदेसक अर नरतक प्रवीण कुमार मूल रूप सूं राजस्थान रै कांकरोली रा रैवासी। भट्यै-भट्यै, गठीलै अर स्वस्थ सरीर रा मालिक प्रवीण कुमार केई फिलमां में सह-अभिनेता रै रूप में काम कर्यों। हाल ई आप कसनै मैणत करै। आप में अहम अर बणावटीपणो