हास्य कविता पर छंदां

हास्य कविता अेङी कविता

जिण नै पढ़'र, सुण'र हियै मांय आनन्द, या हास रो भाव अर हास्य रस री उत्पति हूवै।

छंद3

मुनीम

जयकुमार ‘रुसवा’

ज्ञान

जयकुमार ‘रुसवा’

जुगाड़

जयकुमार ‘रुसवा’