क्या राजा क्या रंक, समय अगाड़ी सब नवैं।
लूटी कपियां लंक, चपयां दे दे, चकरिया॥
भावार्थ:- हे चकरिया, क्या तो राजा और रंक (भिखारी), समय (बलशाली) के आगे सभी झुकते हैं। शक्तिशाली समय की करामात ही रही कि भगवान राम की वानर-सेना के वानरों ने तमाचे मार-मार कर (त्रैलोक्य-पति रावण की स्वर्ण ) लंका को लूटा (और नष्ट किया) ।