एक फळै उपाय, भाग्यहीन रो भूल कर।

सटपट कियां सवाय, चाबुक लागे चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, भाग्यहीन पुरुष द्वारा किया गया कोई एक भी एक भी प्रयास फलीभूत नहीं होता है। उलटा ज़्यादा जल्दी मचाने पर उसका सवाया बिगाड़ा ही होता है (उसे अधिक हानि ही होती है)

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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