सब जानत संसार, आखिर मरणो एक दिन।

किम भूलै करतार, चलणो सेवट, चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, समस्त संसार (यह शाश्वत, कटु सत्य) जानता है कि अंततोगत्वा एक दिन (सभी को) मरना है। जब अंततः (इस संसार को छोड़कर) जाना ही है, तो फिर यह संसार इसके कर्त्तार (रचयिता) को क्यों भूल जाता है?

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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