रावण सरखो राव, सब त्रैलोकी सर करी।

एक बन्यो उपाव, चलती बेळा, चकरिया॥

भावार्थ:- हे चकरिया, रावण के समान (बलशाली) राजा ने तीनों लोकों पर विजय प्राप्त की थी, परंतु (मृत्यु के समय इस संसार से) चलने के समय एक भी उपाय काम नहीं आया (अभिप्राय यह है कि मृत्यु के समक्ष सभी पराजित होते हैं)

स्रोत
  • पोथी : चकरिये की चहक ,
  • सिरजक : साह मोहनराज ,
  • संपादक : भगवतीलाल शर्मा ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी ग्रंथागार
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