नहिं आते हो नहिं आते हो।
क्यों अपना रूप छिपाते हो॥
कितवल ढूंढन जावां तैनु मारग कौन बतावै मैंनु।
दिल का हाल कहुं मैं कैनुं क्यों मुझको भटकाते हो॥
बिरहो बाण लगाया दिल में प्रेम फांस डारी मुझ गल में।
बैठी याद करूं पल-पल में सूरत नहीं दिखाते हो॥
जिम जल बिन मछली हैरानी बिन दर्शन मैं फिरूं दिवानी।
अब तो आकर मिलजा जानी क्यों कर देर लगाते हो॥
कैसी मन में धरी निठाई दिल से मेरी याद भुलाई।
ब्रह्मानन्द सकल जग मांही दीन बंधु कहलाते हो॥