अचरज देखा भारी साधो अनहद की धुन प्यारी साधो देखले चतुर नर अब तो नजरभर गुरु बिन कौन मिटावै भवदुख जन्म-जन्म को मैं दास तुमारो जोग जुगत हम पाई रे पनिया भरन कैसे जावुं री गुजरिया पानिया भरन मत जा सखीरी सुन बाजत बंसरिया