री गुजरिया पानिया भरन मत जा।

आना जाना रोकत कान्हा पनघट निकट खड़ा॥

नटवर नागर पटकत गागर झटपट पट झटका।

बंसी बजावे सुध बिसरावे मीठी मीठी धुन गा।

ब्रह्मानंदा चरणमुकुंदा नम नम नमन सदा॥

स्रोत
  • पोथी : श्री ब्रह्मानन्द भजनमाला ,
  • सिरजक : परमहंस स्वामी ब्रह्मानन्द ,
  • प्रकाशक : श्री ब्रह्मानन्द आश्रम पुष्कर, अजमेर
जुड़्योड़ा विसै