पनिया भरन कैसे जावुं सुन प्यारी आली
आज बनमाली मोरी रोकत डगरिया॥
जमुना के तट पनघट पर नटवर
ठाडो झटपट पट खेंचत चुनरिया॥
संग लिये ग्वाल बाल रास करे नंदलाल
चलत कपट चाल फोड़त गगरिया॥
परम आनन्द कंद हास करे मंद-मंद
ब्रह्मानन्द मुखचंद देख मन हरिया॥