अैसा ज्ञान हमारा साधो।
अैसा ज्ञान हमारा रे॥
जड़ चेतन दो वस्तु जगत में चेतन मूल अधारा रे।
चेतन से सब जग उपजत है नहिं चेतन से न्यारा रे॥
ईश्वर अंशजीव अविनाशी नहिं कछु भेद विकारा रे।
सिंधु बिंदु सूरज दीपक में अेक ही वस्तु निहारा रे॥
पशु पक्षी नर सब जीवन में पूर्ण ब्रह्म अपारा रे।
ऊंच नीच जग भेद मिटायो सब समान निर्धारा रे॥
त्याग ग्रहण कछु करतब नाहिं संशय सकल निवारा रे।
ब्रह्मानन्द रूप सब भासे यह संसार पसारा रे॥