सूर्यमल्ल मीसण
बूंदी रा राजकवि। 'वीररसावतार' रे रूप में चावा। डिंगल में ओज सूं ओतप्रोत 'वीर सतसई' अर पिंगल में 'वंश भास्कर' जैड़े वृहद ग्रंथ रा रचनाकार। 'राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी' रो सिरै पुरस्कार इणां रे नांव माथै देइजै।
बूंदी रा राजकवि। 'वीररसावतार' रे रूप में चावा। डिंगल में ओज सूं ओतप्रोत 'वीर सतसई' अर पिंगल में 'वंश भास्कर' जैड़े वृहद ग्रंथ रा रचनाकार। 'राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी' रो सिरै पुरस्कार इणां रे नांव माथै देइजै।
अग्गैं परिसर अटत करत
अन्नल सुत जयसिंह देव
भूप बलवंत दुर्ग नीरमय
छंद पादाकुलकम्
छोटे बड़े सैनिक छ भेद
धकि तोपन घमचक्क
एकादसि दिन प्रात नयर
गागरोणि अचलेस सजे गढ
इत दिल्लिय कनउज्ज उभय
इत पत्तन अजमेर तजिग
जरैं अपेय अचळ जळ जाणे
झमकि सोम असि झरत
कक्षा उर सिथिल प्रलम्ब
कुमर दूत रनकाज
मधुणिभ दंत जाकै जंघन
रजनि जाम खिल रहत बज्जि
सम्भरीक खिच्ची जिण संतति
सविया दोय मुहुक्कर्मा सुत
तातारी दळ अतुळ साजि रमजान कुतुब सह
तोवर तरनि अनंगपाल