ग़ज़ल17 अै खिलाड़ी बावळा है आज म्हारो गांवडो बीमार क्यूं दीसै आपनै देखियां हुया गैला आफतां बीच अड़ग जीवूं हूं देखो तो म्हारै देस में आवै समाजवाद
जेठानंद पंवार श्यामसुंदर भारती उषाकंवर राठौड़ भूपतिराम साकरिया स्वामी खुसाल नाथ शक्तिदान कविया रेवंत दान बारहठ लालदास 'राकेश'