मंगत बादल
चावा कवि-लेखक। अलेखूं विधावां में लेखन। साहित्य अकादेमी रौ सिरै अर बाल साहित्य पुरस्कार।
चावा कवि-लेखक। अलेखूं विधावां में लेखन। साहित्य अकादेमी रौ सिरै अर बाल साहित्य पुरस्कार।
आं धोरां में
आं धोरां में आय’र रुळगी
आं मन रै कोरा धोरां में
आओ सा! बात करां
आओ! हेलो मारां!
अेक खत नुंवै बरस रै नाम
बात स्यात सदां बण जावै
भूखी लूंकड़ी
देखो! ओ अंधारो
गीत : म्हे मरुधर रा वासी
जंगळ सूं निकळ
जियां बाळू सरकै मुठ्ठी स्यूं
कियां सहेजां सपना बां री
मचा देवै हलचल हर डील में
म्हां रै ऊपर पग धर चढग्या
म्हां री आ जिनगाणी
म्हारौ बसंत
म्हे तो हां झुणझुणियां भाया
मोटर निकळगी कनै सूं
ऊँट अर गादड़ो
राजनेता
रोज-रोज
रोसनी अर गांव
सूरज आज गेरग्यौ घर में
सूरज नै कुण कतल कर दियो
स्याणो बांदरौ
थां नै कांई कैवा भायला
थार रो न्यूंतौ
तिरसो कागलो