कविता7 दस दूहा : आंख माथै नुंवी परिभाषावां नुवों नुवों परभात रै बैठ्यो म्हारो गांव बाहरा सारा, अन्दर सारा
ग़ज़ल9 जठै जठै उजियारा व्हैला दुसमनां सूं तू निभाणू छोड़ दे दूसरी गंगा ल्याणी है बस्ती बस्ती सौर हुयो है बीं की मेरी है दोस्ती
ताड़केश्वर शर्मा राणुसिंह राजपुरोहित विश्वनाथ शर्मा विमलेश छोटूराम मीणा ध्रुव कुमार सक्सेना प्रेम शेखावत पंछी फारूक़ आफरीदी मनोहरलाल गोयल