आज बिंद्रावन रास रच्यो है आज महा मंगल गोकुल में अब नहीं आवूंगो तेरै घरां ब्रजनारी अंखिया में लागि रहे गोपाल बंसी बजाई सांवरै भजो सुंदर स्याम मुकटधारी ए जी म्हारा दीनानाथ मुरारी ए जी म्हारा कृष्णचंद्र बनवारी खड़ी रहूं नारायण आगै, दरसण करकै जावूंगी