पद8 आज बिंद्रावन रास रच्यो है ए जी म्हारा कृष्णचंद्र बनवारी ए जी म्हारा दीनानाथ मुरारी खड़ी रहूं नारायण आगै, दरसण करकै जावूंगी बंसी बजाई सांवरै