तूं साहिब मैं बंदा तेरा। क्यूं करै खसमांनां मेरा॥

दया करौ तौ जीवै हो, रांम रसांइन पीवै हो।

भाव भगति निज दीजै हो, जीव जांनि यूं कीजै हो॥

सील संतोष सुभाया हो, दीजै त्रिभुवनराया हो।

बंदौ कहै सुणीं हरि सांई, टीला कै दूजौ कोई नांहीं॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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