सखी री चंदन दूरि निवारि।
मेरइ अंग आगि सउ लागत, खत ऊपरि मानु खार॥
कुसुम माल व्याल सी लागत, फीके सब सिणगार।
चंद चंद्रिका मो न सुहावइ, जरि हइ अंग अपार॥
सेज निहेजी हुं दु:ख पाऊं, सीतल पवन न डारि।
पिय बिण सुख जिनहरख सबइं दुख, कहिहइ राजुल नारि॥