रे मन जाहिलौ रे, थारै कछु आयौ हाथ।

घर मांहैं आवै नहीं, फिरै पंच कै साथ॥

स्वाण्यौं तूं सोवै नहीं, बैठौ करै उपाधि।

गोब्यंद नैं सुमिरै नहीं, यहु मन बड़ौ असाधि॥

साधां सूं सनमुख नहीं, हरि सूं नांहीं हेत।

ज्यूं आयौ त्यूंही चल्यौ, मूरिख बड़ौ अचेत॥

यहु औसर पावै नहीं, गुर दादू कौ साथ।

टीला चेति हुस्यार हो, गहै रामजी हाथ॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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