रांमजी नांव तुम्हारौ दीजै, मोहि अपनां करि लीजै॥
चारि पहरि दिन जाई। रैंनि अंधारी आई॥
आठ पहर यूं बीता। तुम्ह सूं लागै नहिं चीता॥
बाळापण खेलि गवायौ। तरणापै रांम न गायौ॥
तीजै चित न लावै। चौथै प्रांणीं पछितावै॥
जब तैं जोनि खंदायौ। भ्रमि जनम गवायौ॥
उळटि न कियौ बिचारा। तौ क्यूं उतरै भौ पारा॥
जीव कूं जुरा बियापै। क्रिपा करि कांइ न कापै।
अब टीलौ करै पुकारा। तूं है धणी हमारा॥