ऊठि कहा सोइ रह्यउ, नइंन भरी नींद रे,
काळ आइ ऊभउ द्वार, तोरण ज्युं बींद रे।
मोह का गहळ मांझि, सोयउ बहुकाळ रे,
कछु बूझ्यु नहीं तुं तउ, होइ रह्यउ बाळ रे॥
बहुत खजीनउ खोयउ, अलप कइ हेतरे,
अजूं कछु गयउ नहीं, चेतन चेत रे।
तेरइपुर मांझि वसइ, दूठ च्यारूं चोर रे,
राति द्युंस तेरउ धन, लूटइ ठोर-ठोर रे॥
काचउ कोट जोर जम-दळ लीनउ घेर रे,
काहे बळ फोरइ नहीं, गति समसेर रे।
साहस सधीर धरि, प्रभुता न खोइ रे,
कहइ जिनहरख ज्युं, जइत वार होइ रे॥