मन वाणी अकल आणी बुधि वाणी तार।

अन्न पाणी खुद्या खाणी भीख आणी सार।

साध पावै राम गावै सुरति सावै लार।

भगति चाह्वै भली भावै बोध आवै पार।

नैन बैना तजै सैना राम लैना सार।

ध्यान धैना रस्म पैना जल में लीना लार।

ज्ञान गहना असल चहना देवा कहना यार॥

स्रोत
  • पोथी : रामस्नेही संत स्वामी देवादास व्यक्तित्व एवं कृतित्व ,
  • सिरजक : स्वामी देवादास जी ,
  • संपादक : शैलेन्द्र स्वामी ,
  • प्रकाशक : जूना रामद्वारा चाँदपोल , जोधपुर-342001
जुड़्योड़ा विसै