हरिभज लाहो लीज्यो रे॥

थारो जनम सुफल सो होइ, तूँ अहलो यूँही खोइ॥

लाहो साधूं सेवियां रे, लाहो भगति कीया॥

जीवन मुक्ति फल पामिये, हरि जी को नाँव लीया॥

साधां सेती गोठङी रे, कोटि करैं अपराध॥

धनि रे दिहाङो आज को, म्हारे द्वारे आया साध॥

धन जोबन सब पाहुणों रे, आइ मिल्या दिन दोइ॥

घिरती फिरती छांहङी, जातां वार होइ॥

नैणां वैणां श्रवणा रे, रसना रामइयो गाइ॥

जनम सुफल करि आपणों, बखना बिलम लाइ॥

स्रोत
  • पोथी : बखना जी की वाणी ,
  • सिरजक : बखना जी ,
  • संपादक : मंगलदास स्वामी ,
  • प्रकाशक : लक्ष्मीराम ट्रस्ट, जयपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
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