वीरा ! मो सू भली रे करी

लियो सिसपाळ बुलाय

बुध्ध तिहारी चालणी तुस नै लियो समाय

ओगण तो तै हितकर राख्या गुण कूं दियो वहाय

वटफळ तो नीचो निंवै इरंड ऊपरै जाय

कर ओछा सूं प्रीतड़ी फिर पाछै पिसताय

मन मोती अर काय का इन का येहि सुभाय

हरदी जरदी ना तजै खटरस तजै आम

असली तो ओगण तजै गुण कूं तजै गुलाम

कागा किस का धन हरै कोयल किस कू देय

जीभां तणा हिलोळ सूं जग अपणा कर लेय

जीभड़ियां इमरत वसै जे कोइ जाणै बोल

विख वासग का ऊतरै जीभां तणै हिलोळ

बोदी बाड़ फरांस की विन खेरी खिर जाय

नुगरा माणस छेड़तां पत सुगरां की जाय

वट सूं पातळ छाइया ऊबरती और पान

बो मन तो जद ही गयो जदहि बुलायी जान

डूंगरिया रो वाहळो ओछा तणा सनेह

वहता वहै उतावळा तुरत दिखावै छेह

कड़वा कदै भाखियै मीठा बोलणियां

पदमइया स्वामी भणै भाखै रुकमणियां

स्रोत
  • पोथी : रुक्मिणी मंगळ ,
  • सिरजक : पदम भगत ,
  • संपादक : सत्यनारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ -226020 ,
  • संस्करण : प्रथम
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