पदम भगत
पदम साध या पदम तेली नांव सूं भी जांणिजै। जन साधारण री बोलचाल भासा में 'रुकमणी-मंगल' नांव रे ग्रंथ री रचना करी।
पदम साध या पदम तेली नांव सूं भी जांणिजै। जन साधारण री बोलचाल भासा में 'रुकमणी-मंगल' नांव रे ग्रंथ री रचना करी।
अैसै भणै रुकमणी बाई
अंबिका पूजबा कंवरी चाली
बैठा स्याम सिंघासण ऊपर
ब्रह्मा बावै अंग लेबा लागो
हीयो हरखै मन हंसै
काजळ घालो महंदी लावो
कंप्या सेस महेसगिर कंप्या
क्या मैं भूखा विप्र उठाया
म्हारै हरियल वन रा सूवटडा़
पंच हथियारा छत्री मीलिया
सखी सहेली प्यारी
सांवरियो मोह्यो हे रंगीली नथवारी
सावण री वड़ तीज सहेल्यां
सोवन कळस पटक मणि
उड़-उड़ रे काला कागा
वीरा ! मो सू भली रे करी