बंसी बजाई सांवरै मैं सुधबुध भूली रे,
सांवरिया मोहनलाल बंसी कामणगारी रे॥
थाळ भरोसै चोक में मैं दही सिळायो रे।
रई भरोसै मूसळ सैं मैं आण घमोड़्यो रे॥
दूध भरोसै नीर में मैं जावण दीन्यो रे।
नीर भरोसै दूध सैं असनान कीन्यो रे॥
बाळक भरोसै बाछा नैं मैं बोबो दीन्यो रे।
बाछा भरोसै बाळक नैं मैं खूंटै बांध्यो रे॥
पगां भरोसै पायल नैं मैं हाथां पहरी रे।
नाक भरोसै नथली नैं मैं कानां पहरी रे॥
सांवरिया गिरधारी म्हारै कुंज पधारो रे।
चंद्रसखी भज बालकृष्ण छवि तन मन वारो रे॥