आज महा मंगल गोकुल में कृष्णचंद्र अवतार लिए।
गृह गृह से सब गोपी आई, मधुरे स्वर में गान किए।
मारण कारण चली पूतना, दूध पियत हरि प्राण लिए।
अघासुर मारि बकासुर मारे, दावानल को पान किए।
यमला अर्जुन वृक्ष उखारे, यादव कुल को तारि लिए।
पैठि पताल कालिनाग नाथ्यो, फन पर नृत्य कराय लिए।
सात दिवस गिरि नख पर धारे, इंद्रदेव मद मारि लिए।
केस पकरि हरि कंस पछारे, उग्रसेन को राज दिेए।
चंद्रसखी भज बालकृष्ण छवि, चरण कमल चित लाइ लिए।