देखि चालौ रे बीरा देखि चालौ रे॥

कळिजुग घोर अंधार है, तामैं हाथ घालौ रे॥

कै सोफी कै संतजन, घरि बैठां आवै रे।

ताकूं सुख संतोष दे, तूं कांई टुखावै रे॥

जैंन बोध जोगी जती, सिंन्यासी कोई रे।

साहिब कै नातै मिलै, भारी सुख होई रे॥

जिहिं जो धारी सो करै, अपणीं जिनि छाड़ौ रे।

साध कहैं सो कीजिए, थे रांति मांडो रे॥

साध कहावौ देस मैं, क्यूं करौ लड़ाई रे।

कोई रोस मांनि यूं, कह टीलौ भाई रे॥

स्रोत
  • पोथी : संत टीला पदावली ,
  • सिरजक : संत टीला ,
  • संपादक : बृजेन्द्र कुमार सिंघल ,
  • प्रकाशक : प्रकाशन संस्थान, दरियागंज, नयी दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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