बाँटो द्यूँ नीरों घणा, देखी घणा चराइ॥
माथै कीया पूँछङा, या पहली खेताँ जाइ॥
तीजै व्याँइत अजहूँ व्याई, दूध घणा पण हाथि न आई॥
रात्यों दिहूँ चराई प्याई, दुहों कहाँ डोलै मछराई॥
इस का थणाँ हाथ को लावे, तो साम्ही ह्वै मारण कूँ धावे॥
बछङा आठों पहर पवावे, थण में लिसक रहण नहिं पावे॥