अैसै भणै रुकमणी बाई, सोई वींद हमारो माई

मच्छ रूप हरि धार्‌यो संखासुर दानो मार्‌यो

जिण वेद ब्रह्मा का दीना सतजुग में साका कीना

कच्छरूप हरि धारे मधुकैटभ दाना मारे

देवन कूं इमरत प्यायो असुरां कू जहर पिवायो

वाराह रूप हरि धारे हिरणाखस दाना मारे

जिण वसुधा दंत धर राखी जाका सुर नर मुनि जन साखी

नरसंघ रूप हरि धारे हिरणाकुस दाना मारे

प्रभु नख से उद्र विडारे जिन भक्त प्रळाद उबारे

बावन्न रूप हरि धारे राजा बलि के द्वार पधारे

जिण दोय पैंड भरवायी तीजी कूं ठौर पायी

प्रसराम रूप हरि धारे जिण सहस्त्राबाहु संधारे

जिण प्रथी निछत्री कीनी विप्रां कूं दान दीनी

जिण राम रूप हरि धार्‌यो जिण रावण दानो मार्‌यो

सायर पर सिला तिरायी लंक वभीखण पायी

जिण कृष्ण रूप हरि धार्‌यो कंसासुर दानो मार्‌यो

देवकी की करी सहाई वसदेव की बंध छुडायी

जिण बुध्ध रूप हरि धारे जीवां पर दया विचारे

थांरो जस पदमइयो गावै कछु भगत वधाई पावै

स्रोत
  • पोथी : रुक्मिणी मंगळ ,
  • सिरजक : पदम भगत ,
  • संपादक : सत्यनारायण स्वामी ,
  • प्रकाशक : भुवन वाणी ट्रस्ट, लखनऊ -226020 ,
  • संस्करण : प्रथम
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