षट सासां की एक पल घड़ी एक पल साठ।
साठ घड़ी का पहर का संग्राम दास कहै आठ।
संग्राम दास कहै आठ सांस सौ वरसां तांई।
हूआ अस्सी किरोड़ लाख चौबीस घटाई।
रामभजन बिन खो दिया अकल बिहूंणी टाट।
षट् सासां की एक पल घड़ी एक पल साठ॥