छंद बिअखरी


कित्ती भड़ सादूळ कहिज्जै।
दुयणां धणां जैणि जुध दिज्जै॥
कळह दांन नाकार न किज्जै।
चडावळां रीति चालिज्जै॥

चंडावळां खत्री-ध्रम चल्लैं।
है-थाटे चंपीया न हल्लैं॥
चंडावळां चहूं-खंडि चंडा।
मोटांहीं सौं भारथ मंडा॥

चंडावळां संही खंडि चावा।
दळ-जीत सुरतांणां सौं दावा॥
आया खालू खेति निभै-अंग।
चंडावळां सजीता चौरंग॥

सुकवी चंडावळं समत्थे।
है गै लाख स दीन्हा हत्थे॥
जस कवि चंडावळांन जंपै।
सांसण सौं बह दान समंपै॥

अन ऊ सद छै व्रन अरोगावै।
भुंजाई बळि करन भणावै।
हापां महिपां राघां हत्थे।
रिम-दळ आवटिया भारत्थे॥

करमचंद जगमाल कहिज्जै।
दळ बीजां हीं ओपम दिज्जै॥
पांचा माल चीत्रगढ़ ऊपरि।
गोरी ठेलि न ठिलीया गैवरि॥

पांचै बहादर सरिस अड़प्पे।
अकबर सरिस माल जुध अप्पे॥
रौद्रां सौं आफलि छलि राणां।
ऊजेणे परिगह आपांणां॥

मुंहडै खांडि भुजाडंड मंडे।
खंडरीये सिर रौद्रां खंडे॥
पासै वंस छत्रीसह पेखैं।
देव मुंनींवर भारथ देखैं॥

फरीया सौ सर साबळ फूटैं।
जुधि पमार असपति जूवटैं॥
बहसैं बहदर तणा बंगाळा।
रांण तणा निहसै राउताळा॥

पंचायण ओडवै पमारां।
हेकाकौ भड़ सरिस हजारां॥
परिगह सांग तणौ सह पूरौ।
सति पंमार सूरपति सूरौ॥

गिड़ पंरमार गज-दळ गाहैं।
सब के पहिलौ भारथ साहैं॥
नेजा गुरज कयंबर नग्गे।
लाही असपति हींदू लग्गे॥

लोथां बेहड़ तेहड़ लोथी।
बत्यां लूथ हूआ गळबत्थी॥
मुंहडे खांडि थियौ जुध मल्लां।
ढहि ढैंचाळ पड़े ढिग ढल्ला॥

धड़ धड़ त्रूटंते मुंहि धारा।
पुहप वरसीया सीसि पमारां॥
पांचा खांडि तणै मुंहि पड़ीया।
चांमरीयाळ चीत्रगढ़ि चडीया॥

साकौ करि सह कुळां सहेतौ।
पंचायण हरि-जोति पहूंतौ॥
त्रूटि थिया खगि निहस तहस्सं।
सौ सौ हींदू असुर सहस्सं॥

चढीया खूंदे रुधिर चहचह।
गोरी दळ चीतौड़ि गहमह॥
दळ पळ खडि रुधिर भरि दीधौ।
कोटि बहादरि वास न कीधौ॥

आहाडां सत आडौ आयौ।
वळे रांणि चीत्रौड़ बसायौ॥
विकमाइत रांण वितपंनौ।
दईव उदैसिंघ सिरि छत्र दिन्नौ॥

उदियासिंघ प्रतपै अेहौ।
जाणि गोकळी कान्हक जेहां॥
राणां सैन सयळ सिरदारां।
पह सह ओपम माल पमारां॥

रांणा कन्हा माल रीसांणौ।
परठे अकबर दिसौ पयांणौ॥
माल पंमार अकबर मिळीयौ।
सबळौ ग्रास दीयौ सांभळीयौ॥

अकबर साहि चीत्रगढ़ ऊपरि।
डोहण धरा थियौ गज-डबरि॥
अकबर कन्हा तेणि उचळीयौ।
मालो आवि रांणा सौं मिळीयौ॥

सूर पंमार आवीयौ सत्तिहिं।
भूज पूजीया राणो कुळ भत्तिंहिं॥
पहिलोका बरतारा ऊपर।
सौ जाजपुर घंटाळी सावर॥

झाझी महिमा बीड़ौ झाले।
चढ़ीयौ माल चीत्रगढ़ि चाले॥
अकबरसाह चीत्रगढ़ि आयौ।
साह बहादर नांम सवायौ॥

डेरा आवि तळहटी दीधा।
कळहण मालि महोछब कीधा॥
निग्रह सरि रजि लाल निमध्धा।
बुरजे बुरजे तोरण बध्धा॥

पातसाह चीत्रौड़ि पधारे।
सीसोदीयां दुरंग सिंणगारे॥
आसाउलि दिलि मंडव ऊपरि।
त्रिहुं पातसाहां बांधै तोडरि॥

मुर पतसाह सरिस जुध मंडै।
खुरसाणी आंगमीयौ खडे॥
सांगणी बाबरसौं खग साहे।
गोरी हैवर गैवर गाहे॥

साहि हमाऊ साथ स मेळे।
बहदरसाह समंद्रहि बोळे॥
राजां गढ़े चित्रगढ़ राजं।
ताईये खुरासांण सिरताज॥

किरि रघुनाथ अनै वीसं कर।
सरिखां भड़ां आवियौ समहर॥
वाहर सीता हेक विलागा।
ऊठीया हेक लक रख आगा॥

रचीयौ जेहौ जग रमायण।
तेहौ मंडीयौ चित्रौड़ायण॥
नारद अपछर सूर निरखैं।
दस दिस देवतणा गण देखैं॥

लगि साबाति सीधड़ा लागे।
धड़हड़ चडीया सूर धियागे॥
गड़ड़ै नाळि भाटभड़ गोळा।
दळ पंडवेस थिया गढ़ दोळा॥

बहें जंबूर जबर जंग वाजैं।
भाजैं मेछ न हिंदू भाजैं॥
छांटा तीर गुणांहूं छूटैं।
फूटि जरद्दं सरद्दां फूटैं॥

चामरीयाळ चढैं गढ़ि चल्ले।
दळ रूधा राउते दुझल्ले॥
तई पतसाह साबाति पधारे।
परिगह ढूकवीया पौंतारे॥

अेहै माल खांडि मुंहिं आयौ।
जोध अभंग पंचाइणि जायौ॥
पह पंमार बंगाळां पाड़ै।
आपह प्रांणि मिळै आखाड़ै॥

माल हसती साबळ मारै।
उर चाढ़ै गढ़ हूंत ऊतारै॥
रूकां धार मालदे राउत।
पळ खंडूरे थियौ पांचाउत॥

पिड़ि मालौ घमचाळि पइठौ।
दळ धमरोळ दियंतौ दीठौ॥
पूटैं अणी सांमहौ फेटैं।
उरि चाढ़े गज थाट उरेटै॥

मेछां सरिस जुड़ै जुधि मल्लौ।
भाअै जगचख भल्लौ भल्लौ॥
हाके धके चढावै हाथी।
साबासैं असपति सुर साथी॥

हैवै सरिस जुड़ै हींदूवांणौं।
अचिरज तिणि नारद्द अघांणौं॥
रूधौ दळे मालदे राउत।
पिड़ि पंचायण जेम पांचाउत॥

सुतण विहंडीयौ वाहै सारं।
पड़ते अंग जूजूआ पमारं॥
चढ़ि गजदंते ढाळां चूरै।
निरखैं सुरनर कमळ सनूरै॥

बे लख घट फूटे बांणाउळि।
हाकै माल दळां है-हाहुळि॥
जुधि अरि माल छड़ाळे जूटैं।
फूटैं बगतर पंजर फूटैं॥

हसति खौंदरा मालै हाथे।
सूंडि पड़ै दांतूसळ साथे॥
सार माल सिरि दूंणा साहै।
वैराईयां चौगुणा वाहै॥

लै लै-कार असपति लागै।
ओड़ बंस छत्रीसै आगै॥
जै जै-कार रांम मुख जंपै।
अमुहौ अेकोई चरण न अप्पैं॥

थट आवट हुअैं धर थरहर।
सुरह भगत्त भगत्तां सूवर॥
निहटा भारथि खौंद नरिंदा।
बंदा पछिम पूरब बंदा॥

दीन मंहंमद मंहंमद दख्खैं।
करग वावरैं असू कड़ख्खैं॥
दाखै दीन रौद्रां दळ दाखैं।
रिंणि रौद्रवै तणा छळ राखैं॥

माथै गढ़ जगनेत्र झळंमळ।
मरे सिरे तकि होळी मंगळ॥
सुहड़ां माथे सार सणंकैं।
ऊंची रुधिर धार ऊबकैं॥

रिण भुंई रुधिर धार मैं रच्चे।
माथै भाखर कीचस मच्चे॥
भवि स खत्री वंस हुआ भेळा।
खेलैं जांणि डडेहड़ि खेळा॥

मेछां खत्रि साबळ मारे।
पिंडहूं काढ़ैं लत्त पहारे॥
नेजा फूटैं खत्री सनाहे।
सांम्हा छड़ां चडैं खग साहे॥

बहसे जोध थीयैं गळ-बाथे।
हीए प्रतमाळि चटा वख हाथे॥
बांह गळे कर चट्टा बधे।
करंक अपूठे त्रूटे कंधे॥

बे दळ खांडि मुंहे बेरूंडे।
अवळे अंग उपराठे तूंडे॥
डर-बळीयौ मालौ रण डोहै।
श्रोण झरंते आउध सोहै॥

सिरि चौकड़ी पड़ी सै तारां।
धजवड़ आड़ी त्रेडी धारां॥
अत्रावळि पाअे आळूझैं।
झाझा वंस माल सों झूझैं॥

साळिगरांम सुकंठे सुंदर।
माळ गळै सिरि तुळसी-मंजर॥
माला तणा भीछ मछाळं।
साबळे छड़ै सीस सूंडाळं॥

बाण कमांण भांजि बांहा-बळ।
सींधुर भांगा भांजे साबळ॥
ताईयां सिरे असिमर त्रूटा।
खांडि खांडि राउत पळ खूटा॥

दळ धन धन राउ-ताडुं आढां।
दुसहां उरि भांगी जमदाढ़ां॥
तीर धनंख तरकस तुट्टे।
जुधि मूंगल तरकस-बंध जुट्टे॥

नेजा रहच करे नंजाळं।
फरी नाराजी सौं फरोयाळं॥
खांडा हत्थ पड़े बंध खंजर।
किलंब पड़े बंधण जर कंमर॥

जुड़े जुड़े जोधार जूआणं।
पड़ी पखराळ थट्ट पठाणं॥
जुधि जुड़ि पड़े असलजदं।
माता फिरैं ज सूरत-मदं॥

चांमरियाळ चीत्रगढ़ि चडीया।
पंच निवाज गुदारण पड़ीया॥
रोजा त्रीस रखा रिमराहं।
सरबह पड़ीया कटे सनाहं॥

तेगां धार उभै दळ त्रुट्टे।
आधौ असुर कटक आवट्टे॥
मेवाड़वै सुछळि जुध मंडे।
खुरसाणी बीस गुणां-खंडे॥

पड़ीया हींदू मेछ पगारे।
पिड़ि हेकोकौ पंच पचारे॥
लोहे हींदू मेछ लड़ि लड़ि।
खांडितड़ै मुंहि हूवा खींचड़ि॥

रिड़तै मुकत केस रुहिराळै।
वणीयौ माल संग्राम विचाळै॥
आरति हंसा अपछर आवैं।
पुहपमाळ कंठे पहिरावैं॥

धमळ गंग गाउ सिरधारं।
पूजीजै रुद्रमाळ पमारं॥
पित आपरा जेम अणपल्लं।
मिळीयौ मुगति पदारथ मल्लं॥

त्रूटौ सारे माल निभैतन।
गायां खुरे क जाणे गोधन॥
पड़ीयौ मालौ खांडि पगारे।
श्रोण तणा पिण्ड पितरां सारे॥

कजि चीत्रौड़ करे महि कंदळ।
मालि भेदियौ सूरिज-मंडळ॥
माला तणा सुतन कळिमूलं।
सक सुरतांण सांग सादूळं॥

माला तणा सुत वड मंन्नं।
कला बलिभद्र आसकरन्नं॥
कोई कहै नह हालै केड़ं।
सोहां आप आप-सां खेड़ं॥
स्रोत
  • पोथी : जाडा मेहड़ू ग्रंथावली ,
  • सिरजक : जाड़ा मेहड़ू ,
  • संपादक : सौभाग्यसिंह शेखावत ,
  • प्रकाशक : राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी, जोधपुर ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै