छंद त्रोटक

गुरुदेव सुमत्ति समापि गणं।
भुवपत्तिय जेमि रतंन भणं॥
पित जास महेस नरेस पिरं।
गढ विड्ढि लियौ जिणि देवगिरं॥

छळि साहि तणै ग्रहि खग्ग छरा।
धुंसी चढि लीध बलक्क धरा॥
सनमान करे सुरताण सई।
जाळोर पटै गढ दीध जई॥

केवियां दळ तंडळ जेणि किया।
दन सासण लक्ख गजेन्द्र दिया॥
कमधज्ज कणैगिरि राज करे।
विधि अेणि गयौ स्रग क्रित्ति वरे॥

तिणि पाटि रतंन महेस तणै।
घण थाट लियां तपतेज घणै॥
मलराव जिहीं जगि आपमला।
भुज पूजै साहिजिहान भला॥

दूहा

जीवत म्रित हुइ साहिजहां दिल्लीवै सुरताण।
राति दीह अंदर रहै नह मंडै दीवाण॥

धुंध हुवै सारी धूरा सहर दिली पड़ि सोर।
मुहिम हुंता त्यां मंडियौ ज्यां साहिजादां जोर॥

गुज्जर धरा मुराद ग्रहि बिजड़ौ तोलि दुबाह।
माथै छत्र मंडाड़ियौ हुइ बैठौ पतिसाह॥

धर पूरब सुज्जो धणी दखिणी खरौ दुगाम।
साहिजहां दारासुकर त्यां सिर कोपे ताम॥

हिंदू ताम हकारिया सिंध जसौ जैसिंघ।
किया विदा कूरम कमंध अे बेवै अरडिंग॥

दिया वधारा देस दे है वर द्रब्ब हसत्ति।
पतिसाही थां उप्परां यूं कहियौ असपत्ति॥

सुज्जा दिसि जैसिंघ सझि दुज्जौ मांन दुबाह।
पोतो साथै परठियौ पूरब धर पतिसाह॥

साहिजादां बिहुं सांमुहौ अेक जसौ अणभंग।
मांडण असपति मांडियौ जोध कळोधर जंग॥

दळ बादळ ताबीन दे हिंदू मुस्सळमाण।
चगथै जसौ चलावियौ जुध मंडण जमराण॥

छंद भुजंगी

जसौ हालियौ आगरा हुंत ज्यारां।
लियां साहिरा उम्बरां स्रब्ब लारां॥
कमंधां बड़ां कूरिमां साथि कीधां।
लजाथंभ सीसोदियां संगि लीधां॥

हाडा गौड़ जादव्व झाला हठाला।
वळे वंस छत्रीस साथै वडाला॥
गाडी नाळि गोळा चलै फौज गज्जं।
धरा व्योम आधोफरै उड्डि धज्जं॥

आराबां निबाबां किया थट्ट अग्गै।
पबै गाहिजै घाट औघाट पग्गै॥
हलीलां हिलै संप फौजां हसत्ती।
प्रथी संगि लग्गा केई देसपत्ती॥

वहंती इसी पंथि आप्पै वहीरं।
नदी हेम थी ले चली जांणि नीरं॥
कतारं कठट्ठे चले जुंग काळा।
वहै बादळा जांणि भाद्रव्व वाळा॥

फटौ आभ कै जांणि सामंद्र फट्टं।
प्रिथंमी गिरं थुंब किज्जै पहट्टं॥
वहै उप्पटं थट्ट राठौड़वाळा।
नदी सोखिजै नीर निव्वाण नाळा॥

वहंतां तुरां पाय पायाळ वाया।
छिलै रज्ज रैणां उडै व्योम छाया॥
धरा सेस धूजै डिगै धू धड़क्कं।
चढै लंक चक्कं डरै च्यार चक्कं॥

चलंता इसा मीर तीरां चलावै।
पंखी जीवता म्रिग्ग जाणै न पावै॥
माथै साहिजादां बिहां राव मारू।
सझे चालियौ अेम उज्जेणि सारू॥

दूहा

खेड़ेचौ दरकूच खडि आयौ गढ उज्जेण।
पतिसाहां सूं पाधरै लोह जरीका लेण॥

बंधव रतन बुलावियौ जसै रचण रिण जंग।
साह हुकम छळि साह रै आयौ खड़े अभंग॥

गढपति मिळे उजेणि गढि राजा जसौ रतंन।
राम लखम्मण राठवड़ किरि दुज्जोण करंन॥

हसतिमार भेळौ हुवौ काळौ दळां किंवाड़।
भागां पडिगाहण भड़ां पिडि अणभंग पहाड़॥

काळै अजुवाळौ कियौ आवि दळां अवियट्ट।
चारण भाट चगाहटां गुणियण थट्ट गरट्ट॥

पति दिल्ली जोधांणपति धजवड़ ग्रहे सधीर।
करण भीर भारथ करण वीर मिळै वर वीर॥

दूहा

बे भाई बिरदाळ औरंगसाह मुराद इम।
हेवै पति भेळा हुवा जुध मंडण जमजाळ॥

कटकां हुय बिहुं कूंच गड़गड़ त्रंबागळ गुड़ै।
हड़बड़ भड़ हुय हैवरां चढिया पोरिस चूंच॥

बहरहि हिळै बहीर पायक ओठक पड़तळां।
मिळिवा किर चाली महण नवसै नदि ले नीर॥

डाकी जमडाढाळ बे बे तरकस बंधिया।
तुरकी रहवाळां तुरक चढिया चामरियाळ॥

गुज्जर तणा गरुर ताइ मिळे दिखणी तणा।
सेन उजेणी सामुहा सालुळिया दळ सूर॥

रचि फौजां रौद्राळ हैंवर नर वहता हसति।
मांडण इंद्र झड़ मांडियौ बादळ किर वरसाळ॥

बागां करे बणाव सिर परि धरि मूंछां सुकर।
जमदढ खग कसिपति जवन जगमग नग्ग जड़ाव॥

आया बाहिर अेम बैसि गजां मेघांडंबर।
चगथा बे ढुळता चमर हीर जड़ित छत्र हेम॥

रुळि काहुळि त्रंबाळ तूरहि भेरि नफेरि त्रहि।
आरोहे अैराकियां झिळियां पंथ झुलाळ॥

गजराजां आग्राज गाज हुवै त्रंबागळां।
फौजांधज नेजां फररि वहतां हीं जरि वाज॥

पड़ताळां पाताळ बहतां तुरी बजाड़ियौ।
उड़ी रजी छायौ अरस किय झांखो किरणाळ॥

धूवां रव दव धोम खेहारव डंबर खरा।
क्रमतै रौद्रायण कियौ व्योम विचाळै व्योम॥

जुदा हुवै जिंद जीव म्रिग खग आमुज्झै मरै।
मारगि वहतै मांडियौ दाणव प्रळै दईव॥

धर सारी पड़ि धाक पुर तर गिर कीजै पहट।
हैकंप उर नागेंद्र हुव चक च्यारूं चढि चाक॥

सेन इसा सुरिताणि चगथै चढै चलाविया।
उल्लटिया इळ ऊपरै जलनिधि सुर चेत्र जाणि॥

गूंडळियौ रज गैण हैकंप धर डेरा हुवा।
साहजादा दर कूच सूं आया खड़े उजैण॥

गाहा चौसर

दळ दिखणाधि उतर देठाळै।
डेरा दुहुं दिया देठाळै॥
दुहुं बाजार झंडा देठाळै।
दामणि गजां धजां देठाळै॥

निपट बिन्है दळ आया नैड़ा।
नरां सुरां भ्रति आया नैड़ा॥
नौबति सोर धड़ड़ि धुबि नैड़ा।
नाळि निहावि गाजिया नैड़ा॥

दूहा

औरंगसाह मुराद इम मिळि लिक्खै फुरमाण।
राजा राह म रोकि तूं साह लगै दे जाण॥

राड़ि म करि इक तरफ रहि आगै पीछै आव।
जोइ दिली फिरि जाइस्यां परसि असप्पति पाव॥

जसवंत सुणे जबाब जब आगा कहियौ अेमि।
मौ थां आडौ मेल्हियौ कहौ जाण द्यूं केमि॥

कवित्त

सुणि जबाब जसराज तेड़ि सत्ताब महाभड़।
सूर बलू सारिखा जिसा गोवरधन अनड़॥
बींद घड़ा बानैत तेड़ि माहेस तियारां।
पीथळ क्रन्न उदिल्ल जिसा मधुकर झूझारां॥
जगराज रुघा गिरधर जिसा पूछि जसै मोटा पहां।
उम्बरां नरां असपति सूं कहौ जाब कासूं कहां॥
इम अक्खै उंबराव राज जितरौ कुण जाणै।
मती वखत तप तेज राज सूरज हिंदुवाणै॥
तुम सहि जोधां छात जोध सारा इम जप्पै।
तुम सिरहर दुइ राह साह सोबै करि थप्पै॥
कमधजां आज माहेस कौ कहियौ यां दुज्जौ करन।
जुधबंध खत्री ध्रम जाणगार राजा बळि बुज्झौ रतन॥

छंद बिअक्खरी

राजा जसवंतसिंघ रचण रण।
ताम रयण तेड़ियौ न्रिभै तण॥
बेठा बे आलोच बहादर।
सूं पतिसाहां सूत्रण समहर॥

सूरिजमल गंग बाघ सलक्खां।
पाटोधर चाढण जळ पक्खां॥
मुहरै अणी किया रिणमल्लां।
चांपां कूंपां जैत अचल्लां॥

धुरि गोदौ वीठल क्रन धूहड़।
आडा साहि मंडिया अन्नड़॥
बलू दलाउत सहितौ बेटां।
हर ऊदल अविनासी हेटां॥

जोधा हरौ रूप जेतारण।
रिणमालां जोड़ै धरियो रण॥
क्रमा हरौ गिरवर रिण काळौ।
पीथलिया जांवलि प्रांचाळौ॥

ऊदौ जगौ किया बे आगै।
जोड़ करन जेता छळ जागै॥
धरिया मुंहरि अणी गिरधारी।
हेवै दळ हेडवण हजारी॥

तिजड़ा हथ सूजौ केहरि तण।
किलंबां धड़ा करण रण कणकण॥
बंधव रासौ बेळ महाबळ।
खागां मुहि पाडणौ बड़ां खळ॥

बिरदां तणौ मोड़ सिरि वाधौ।
मारण मरण करण रिण माधौ॥
अखाहरौ चाढण जळ अक्खां।
सोनगिरौ आगळि सळक्खां॥

केसवदास तणौ गज केहरि।
आयौ मान झालियां असमरि॥
भाटी सुरताणौत भुजाळौ।
छिलतै मछरि रुघौ छत्राळौ॥

ऊहड़ मेघ झालियां असमर।
आधारै डिगतौ भुजि अंबर॥
बीजा या साथे दळ सब्बळ।
भाई बंध भतीज भुजागळ॥

महि लोहड़ौ खुरसाण मंडोवर।
अड़ियौ बड़ा सरस ग्रहि असमर॥
डेरा पूठि चंदोल दिवारे।
सझियौ गोल विचै सिरदारे॥

त्यां माहे जसराज गजणतण।
जोधाहरौ मांण दुज्जोयण॥
सूजावत गोढै मधकर सझि।
कमधज राव तणां जतनां कजि॥

बे भाई ग्रहि खग्ग बहस्से।
इम अंबर लग्गा ऊसस्से॥
रण रामायण जिसौ रचावां।
लड़े मरां चंद नाम लिखावां॥

जसवंत अेम बोलियौ ज्यारां।
तण माहेस अरज की त्यारां॥
जोधां धणी घणा दिन जीवौ।
दळ सिणगार बंस घर दीवौ॥

दे सोबौ पतिसाह मूझ दळ।
सबळी लाज मरण छळ सब्बळ॥
मरण तणौ सोबौ दे मोनूं।
टीलौ राज धरा छळ तोनूं॥

सारी धर भोगवि गढ साजा।
रिण आवगो मूझ दे राजा॥
रिण मो रहियां राज रहेसी।
कमंधां कोइ न बुरो कहेसी॥

क्रन मरतै दुज्जौन गयौ क्रमि।
त्रीकम काळजवन आगै तिमि॥
राजा किसन दाव करि रहियौ।
दाणव तिकौ पछे फिरि दहियौ॥

हार जीप वातां हरि हाथे।
बिहुं पतिसाह सरिस हूं बाथे॥
साहतणा गंजूं दळ सारे।
धड़ म्हारौ भंजूं खग धारे॥

औरंगसाह दिसौ आखौ इम।
जुध करिस्यां कैरव पांडव जिम॥
आहवि वाहि वहाड़ि असिम्मर।
महाराज ले जाज्यौ मधुकर॥

मतौ दिढाइ मिले राव मारू।
सीख रतन कीधी स्रगि सारू॥
ताम जुहार कियौ खग तोले।
बीजे भवि मिलिस्यां हसि बोले॥

जीवै तिके भलां घरि जावौ।
आवै स्रगि मो साथे आवौ॥
कालै मरण मनोरथ कीधा।
लाज मरण भारथ भुजि लीधा॥

आप तणै डेरे फिरि आयौ।
जोध जड़ागि मलैगिरि जायौ॥
करि अंगपान सनान महाक्रित।
बड़ तीरथ मझि विप्र दिया वित॥

सपत धात चौरंग लिखमी सह।
वगसे असि रैणा सुरही बह॥
देवां दरसि फरसि जाइ द्वारे।
पूजा करि डेरे पाधारे॥

होम कराड़ि भणांडि विप्रां हद।
जंपि आवाहन सुर ईसट जद॥
करि भुंजाई चाढि कड़ाला।
विधि विधि सहि भोजन्न वडाला॥
पांति रची चौंसर प्रौंचाळै।
कवि रजपूत पोखिया काळै॥

स्रोत
  • पोथी : वचनिका राठौड़ रतनसिंघजी महेशदासौत री ,
  • सिरजक : खिड़िया जग्गा ,
  • संपादक : काशीराम शर्मा, रघुवीरसिंह ,
  • प्रकाशक : राजकमल प्रकाशन, दिल्ली ,
  • संस्करण : प्रथम
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