हेत बहुत हस्तनी, केस अति कुटिल विराजत,

द्रिग देखत मृग नैन, चपल अति खंजन लाजत।

कनकलता कामनी, बीज दाड़िम दसनावत,

पहुप वेस पहरंत, कंत अति हेत सुहावत।

अति चतुर, कुच्च कंचन कलस, काम केलि कामन करै,

अल्लावदीन सुलतान सुण, लच्छन हस्तन धरै॥

स्रोत
  • पोथी : पद्मिनी चरित्र चौपाई ,
  • सिरजक : जटमल नाहर ,
  • संपादक : भंवरलाल नाहटा ,
  • प्रकाशक : सार्दूल राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर (राज.) ,
  • संस्करण : प्रथम
जुड़्योड़ा विसै