चाबक चंचल लाइ चपल चित्त चित्रणी फिर्यौ ताम सुलतांन हेत बहुत हस्तनी हुकम कियो पतिसाह कहै ताम सुलतान कहै ताम जोगेंद्र कहै ताम सुलतांन लाख लहै ढोलियो पदमगंध पदमनी पदमावति मुखचंद पान हुते पातरी सदा मरावै साह सिद्ध बड़ो जोगेंद्र सुभट सुभट सुं लड़ग