लाहौर रा जैन श्रावक कवि।
कह रांणी पदमावती
चपल चित्त चित्रणी
चाबक चंचल लाइ
फिर्यौ ताम सुलतांन
हुकम कियो पतिसाह
हेत बहुत हस्तनी
ग्रहै बरछी जब गोरल राय
तजै तरवार गुरज्ज भिड़ाय
लड़ै जब गोरल बांवन वीर