लोयण भरि निरखंत, कांम मुख कथा वखाणै।
आंगुळीयां मोड़ंत, कहै मन रीस न आणै।
आळस भांजै अंगि, कठिन कुच उदर दिखावै।
सखी कंठ करि पासि, घालि निज हंसै हंसावै।
सुकमाल बाल भीड़ै हीयै, बाइक मिट्ठ वखांणीयै।
जिनहरख कहै त्री रागिनी, इण आचरणे जाणीयै॥