देख, झरोखा जाळी देख।

अंबर मैं दीवाळी देख।

राजाजी म्हैलां मैं छुपकै

करै तेरी रखवाळी देख।

खुद की भूख भूल टी.वी. मैं

सजी सजाई थाळी देख।

तेरी चांद हो गई गंजी

उणकी जुल्फां काळी देख।

खुद ही मिट्ठू मियां बण रह्या

लोग बजावै ताळी देख।

दूध-गूजरी धक्का खावै

बैठी ठौड़ कलाळी देख।

बैठी देखणो फिल्मी फायर

जा अपणी घरहाळी देख।

उणनै के कहणो-सुणनो है

दुनिया देखी भाळी देख।

स्रोत
  • पोथी : बिणजारो ,
  • सिरजक : रमेश जोशी ,
  • संपादक : नागराज शर्मा ,
  • प्रकाशक : बिणजारो प्रकाशन पिलानी (राजस्थान) ,
  • संस्करण : अंक-31
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