म्हैं काच में देख रयौ हूं।
चैरौ घावां सूं भर्योड़ौ है।
किणरौ है औ?
म्हैं अेक पुकार सुण रैयौ हूं।
—म्हारै हियै में?
अथवा आ फगत हवा री चीस है? बीचली रात में फेर
औ गीत पसरतौ जावै है
आह...!
हरेक चीज जमती जावै है,
करड़ी हुवती जावै,
म्हैं कीं नीं जाण सकूं।
विदा...!